भारत की कर (tax) व्यवस्था

किसी भी देश को न्यायपूर्ण तरीके से चलाने के लिए उस देश में शासन कर रही सरकार को वहाँ के योग्य नागरिकों (Eligible Citizens) से कर (Tax) इकट्ठा करने की आवश्यकता होती है। ऐसे में स्थानीय सरकार को कर देना हर किसी के जीवन का अभिन्न अंग होता है; फिर चाहे वो दुनिया में कहीं भी रहे। देश के नागरिकों से लिए जा रहे ये कर कई रूपों में एकत्र किए जाते हैं। उदाहरण के लिए राज्य सरकार कर, केंद्र सरकार कर, प्रत्यक्ष कर, अप्रत्यक्ष कर और भी बहुत कुछ। इसलिए आइये आज के इस अंक में हम भारतीय कराधान (Indian Taxation) के दोनों प्रकारों: (1) प्रत्यक्ष कर (2) अप्रत्यक्ष कर सहित सरकार को भुगतान की जाने वाली प्रक्रिया को भी आसान शब्दों में समझने का प्रयास करें।

कर(Tax) क्या है?

कर एक अनिवार्य शुल्क या वित्तीय लागत है जो किसी भी सरकार द्वारा किसी व्यक्ति या संगठन पर बेहतरीन सुविधाएं और बुनियादी ढांचा प्रदान करने वाले सार्वजनिक कार्यों हेतु राजस्व एकत्र करने के लिए लगाया जाता है। इकट्ठा किए गए धन का इस्तेमाल विभिन्न सार्वजनिक व्यय कार्यक्रमों को धन देने के लिए किया जाता है। अगर कोई व्यक्ति करों का भुगतान करने में विफल रहता है या इसके लिए योगदान करने से इनकार करता है तो उसे पहले से निर्धारित किए गए कानून के तहत गंभीर परिणाम भुगतने होते हैं।

कर कुल कितने प्रकार के हैं?

व्यक्ति हो या कोई व्यवसाय/संगठन, सभी को कई रूपों में संबंधित करों का भुगतान करना पड़ता है। इन करों को आगे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में उप-वर्गीकृत(sub-categorized) किया जाता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें कराधान अधिकारियों को कैसे भुगतान किया जाता है। आइए, हम दोनों प्रकार के करों के बारे में विस्तार से जानते हैं:

1.प्रत्यक्ष कर(Direct Tax)

  • प्रत्यक्ष कर की परिभाषा इसके नाम में ही छिपी है जिसका अर्थ है कि यह कर निर्धारिती द्वारा सीधे सरकार को भुगतान किया जाता है
  • भारत में इस प्रकार के कर के सामान्य उदाहरण आयकर(Income Tax) और धन कर(Wealth Tax) हैं।
  • सरकार के दृष्टिकोण से, प्रत्यक्ष करों से कर आय का अनुमान लगाना अपेक्षाकृत आसान होता है क्योंकि यह पंजीकृत करदाताओं की आय या धन से सीधे संबंध रखता है।

2. अप्रत्यक्ष कर(Indirect Tax)

  • अप्रत्यक्ष कर प्रत्यक्ष करों से थोड़े अलग होते हैं और वसूली का तरीका भी थोड़ा अलग होता है। ये कर उपभोग-आधारित(consumption-based) होते हैं जो वस्तुओं या सेवाओं पर तब लागू होते हैं जब उन्हें खरीदा और बेचा जाता है।
  • अप्रत्यक्ष कर भुगतान सरकार द्वारा वस्तु/सेवाओं के विक्रेता(seller) से प्राप्त किया जाता है।
  • बदले में  अंतिम उपयोगकर्ता(end-user) यानि वस्तु/सेवा के खरीदार(buyer) से विक्रेता (seller) यह कर वसूल करता है।
  • इस प्रकार वस्तु/सेवा के अंतिम उपयोगकर्ता के रूप में अप्रत्यक्ष कर सीधे सरकार को कर का भुगतान नहीं करता है।
  • अप्रत्यक्ष कर के कुछ सामान्य उदाहरणों में बिक्री कर, वस्तु एवं सेवा कर (GST), मूल्य वर्धित कर (VAT), आदि शामिल हैं।

भारत की कर व्यवस्था में लाए गए आधुनिक सुधार

भारत सरकार ने वर्ष 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) की शुरुआत की, भारत सरकार के इस कदम को स्वतंत्र भारत में अब तक का सबसे क्रांतिकारी कर सुधार माना गया। इससे पहले भी, सरकारें विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाने या विभिन्न वस्तुओं को खरीदने के लिए विभिन्न राज्य और केंद्र कर लगाती रही हैं। पहले के सुधारों के साथ समस्या यह थी कि कराधान प्रक्रिया जटिल थी और विरोधाभासी नियमों ने कुछ लोगों को प्रणाली में मौजूद कमियों के जरिये करों से बचने के योग्य बनाया था। GST की शुरूआत के बाद, करदाताओं का एक उच्च प्रतिशत कराधान छत्र के अंतर्गत लाया गया और करों का भुगतान करने से बच निकलने वालों के लिए तो ये और सख्त हो गया।

इनकम टैक्स क्या है? (What is Income Tax?)

यह सबसे सामान्य प्रकार का कर जो योग्य नागरिकों को सरकार को देना होता है। आपकी आय का एक भाग हर साल सरकार को भुगतान किया जाता है और सरकार इस पैसे का उपयोग देश भर में वृद्धि और विकास गतिविधियों को समर्थन देने के लिए करती है।

आयकर निर्धारिती (Income Tax Assessee)

कोई भी व्यक्ति जो कर दाखिल करने के लिए उत्तरदायी है और उनका देय आयकर स्लैब में आता है, वह आयकर निर्धारिती है। कोई व्यक्ति जिसकी नियमित आय है और उसे कर भुगतान करने में छूट प्राप्त है, उस व्यक्ति की वार्षिक आय समय-समय पर सरकार द्वारा निर्धारित सीमा स्तर से कम होनी चाहिए या उसकी आय कृषि जैसे छूट वाले स्रोतों से उत्पन्न होगी।

आयकर स्लैब (Income Tax Slab)

जैसा कि पहले बताया गया है, सभी व्यक्ति कर की समान राशि का भुगतान नहीं करेंगे; सामान्य नियम है – आपकी आय जितनी अधिक होगी, आपको उतनी ही अधिक कर राशि का भुगतान करना होगा। यह निर्धारित करने के लिए कि कर की दरें और नियम एक समान न होकर निष्पक्ष होती हैं, सरकार उस दर को निर्धारित करने के लिए आयकर स्लैब का इस्तेमाल करती है जिस पर प्रत्येक व्यक्तिगत कर निर्धारिती आयकर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है।

आयकर कटौती (Income Tax Deductions)

₹ 2.5 लाख रुपये से अधिक कर योग्य आय वाले नागरिक उनके लागू स्लैब के अनुसार आयकर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं। हालांकि, कुछ टैक्स बचत विकल्प मौजूद हैं जैसे ELSS, म्यूचुअल फंड, PPF, EPF, टैक्स सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट, और अन्य जिनका इस्तेमाल व्यक्ति द्वारा देय आयकर को कम करने के लिए किया जा सकता है। इनमें से अधिकतर कर बचत योजनाएं आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80C और 80D के तहत मौजूद हैं।

स्रोत पर कर कटौती (Tax Deducted at Source)

स्रोत पर कर कटौती के लिए संक्षिप्त TDS को किसी भी सैलरी पाने वाले व्यक्ति से सरकार द्वारा कर कटौती के सबसे सामान्य तरीकों में से एक माना जाता है। फ़िक्स्ड डिपॉज़िट(FD) पर दिए जाने वाले ब्याज के मामले में TDS के अन्य मामले देखे जा सकते हैं। हालांकि, इस मामले में भी, कर निर्धारिती को आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद रिफंड मिल सकता है।

कर चोरी कानून और उनका आशय (Tax Evasion Laws and Implications)

भारत सरकार द्वारा कराधान से संबंधित विभिन्न अधिनियम बनाए गए हैं और प्रत्येक नागरिक इन नियमों का पालन करने के लिए उत्तरदायी है, ऐसा न करने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। कराधान कानूनों की कुछ धाराओं और गैर-अनुपालन के लिए लगाए गए दंड इस प्रकार हैं:

  • धारा 140A (1): यदि कोई निर्धारिती करों का भुगतान करने में विफल रहता है, चाहे वह आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से ब्याज की मूल राशि पर हो, तो उसे दोषी (Defaulter) माना जाएगा। कर निर्धारण अधिकारी धारा 221(1) के अनुसार बकाया के बराबर जुर्माना लगा सकता है।
  • धारा 271 (C): यदि कोई निर्धारिती वास्तविक आय या कमाई का खुलासा नहीं करता है, तो इस धारा में दोषी पर 100% से 300% का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • धारा 142 (1) और 143 (2): इन धाराओं के अंतर्गत दोषी को एक आयकर नोटिस भेजा जाता है और यदि वह इसका जवाब नहीं देता है, तो निर्धारण अधिकारी निर्धारिती को लिखित रूप में संपत्ति और देनदारियों का रिटर्न दाखिल करने या सभी विवरण प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है।

करों का भुगतान सभी नागरिकों के जीवन का एक अभिन्न अंग है और यह उचित सेवाएं और प्रावधान प्रदान करके देश के हर वर्ग की वृद्धि में मदद करता है साथ ही इन करों के अतिरिक्त कई दूसरे तरह के कर भी हैं: जैसे जीएसटी(GST), मूल्य वर्धित कर (VAT), संपत्ति कर, सेवा कर, बिक्री कर, मनोरंजन कर आदि जिनके द्वारा भी  सरकारी धन का निर्माण सभी वर्ग के विकास के लिए किया जाता है।

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