कविता– दूबे जी का स्वप्न ज्ञान

इस कविता में व्यंगात्मक तरीके से कवि ने लोगों के मुद्दे से फिसलने वाली छवि को व्यक्त करने की कोशिश की है। इसका किसी जाति-धर्म से कोई भी संबंध नहीं है। क्यूंकि कवि तो बस दूबे शब्द का प्रयोग समाज को डुबाने और भटकाने वाले चरित्रों को प्रदर्शित करने का अपना अवांछित प्रयास किया है। … Read more

चुनावी मौसम पर कविता – चुनाव जीत गए

कविता - चुनाव जीत गए

चुनाव पर कविता: अधिकांश भारतीय, राजनेताओं को भ्रष्ट के रूप में देखते हैं और सवाल करते हैं कि चुनाव प्रभावी हैं या नहीं। आधे से थोड़ा अधिक भारतीय वयस्क (54%) अपने देश में जिस तरह से लोकतंत्र काम कर रहा है, उससे संतुष्ट हैं, लेकिन एक तिहाई असंतुष्ट हैं। इन चुनाव के मौसम में मैं … Read more