जानिये कुछ दिन खाना न खाने(fasting) से कितना वजन घटता है?

उपवास का मतलब है कि कुछ समय तक खाना और पीना बंद करना। ये प्रथा देश और धर्मो में होती है। ये धार्मिक और आध्यात्मिक उद्देश्यों के अलावा, आजकल लोग इसे अपनी सेहत और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भी करते हैं।

उपवास के दौरन शरीर में कुछ बदलाव होता है। इसके सबसे बड़े फायदे हैं कि इंसुलिन मे स्टार्च (starch) कम हो जाता हैं। इंसुलिन का उत्पादन हमारे अग्नाश्य यानी Pancreas में होता है। भोजन करने के बाद जब रक्त में शुगर और ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है, उस समय उस बढ़ी हुई शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का स्त्राव होता है । जब इंसुलिन की मात्रा अधिक होती है तब शरीर fat मोड में होता है, मतलब वह अधिक से अधिक पोषक तत्व को चारबी के रूप में भरने में लगा होता है।

जब fasting करते है तो इंसुलिन का स्टार्च कम होता हैं और शरीर “फास्टेड” मोड में आ जाता है। इस मोड में शरीर में स्टोर फैट को एनर्जी के लिए इस्‍तेमाल करता है और इससे वजन घटा सकते हैं। इसके अलावा शरीर ऑटोफैगी मोड में आ सकता है, जो कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमे डैमेज सेल्स (damage cells) को तोड़े और फिर उनका इस्तमाल करके वह सैल को नया बनाता है। ऑटोफैगी की वजह से कई स्वास्थ्य लाभ मिले हैं जैसे कि इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में और कैंसर जैसी बीमारी से बचने में मदद मिल सकती है।

वजन घाटने और autophagy के अलावा, फास्टिंग से कई और स्वास्थ्य लाभ मिले हैं। जैसे कि ये ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है, इन्फ्लेमेशन को कम कर सकता है और insulin sensitivity  को बेहतर बना सकता है। फास्टिंग को cognitive function जैसे की बढ़ी हुई mental clarity और improved memory के साथ जोड़ा जा सकता है।

उपवास से ये स्वस्थ लाभ प्राप्त करने का एक स्पष्टीकरण ये है कि उपवास के दौरान कीटोन्स का उत्पादन होता है। कीटोन्स एक प्रकार के मॉलिक्यूल्स है जो लिवर में glucose की कामी होने पर उत्पन्न होते हैं। केटोन्स को कई स्वास्थ्य लाभ मिले हैं जैसे कि कॉग्निटिव फंक्शन को बेहतर करना, इन्फ्लेमेशन को कम करने और फैट को बर्न करने में मदद करना।

उपवास के सारे लाभ के बावजूद, इसे सुरक्षित रूप से करना जरूरी है। कई दिन तक फास्टिंग करने से dehydration, electrolyte imbalances और काई और स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ सकता है। उपवास सभी लोगों के लिए सही नहीं है जैसे की गर्भवती महिला।

उपवास के सारे लाभ के बावजूद, इसे सुरक्षित रूप से करना जरूरी है। कई दिन तक फास्टिंग करने से dehydration, electrolyte imbalances और काई और स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ सकता है। उपवास सभी लोगों के लिए सही नहीं है जैसे की गर्भवती महिला।

उपवास से स्वस्थ लाभ प्राप्त करने के लिए इसे सुरक्षित तरीके से करना बहुत जरूरी है। इसके लिए हेल्थकेयर प्रोफेशनल से सलाह लेना, छोटे छोटे फास्ट से शुरू करना और धीरे धीरे इसे बड़ा करने के साथ फास्टिंग के दौरन पानी और पोषक तत्व का सेवन करना और फास्टिंग के समाप्त होने के बाद आहार को धीरे से शुरू करना जरूरी है।

उपवास के अलावा, आहार और व्यायाम की भी बहुत बड़ी अहमियत है। एक संतुलित आहार खाना, पोषक तत्व से भरपुर आहार खाना और जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और मिठाई का सेवन कम करना बहुत जरूरी है। व्यायाम भी स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी है, कम से कम 30 मिनट रोजाना व्यायाम करना बहुत लाभकारी होता है।

उपवास एक बहुत ही प्रभावशाली उपाय है अपनी सेहत और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए, लेकिन इसे सुरक्षित तरीके से करना बहुत जरूरी है। फास्टिंग के साथ सही आहार और व्यायाम का सेवन करना एक healthy lifestyle बनाने का सबसे बड़ा कदम है। एक बात जो बहुत जरूरी है, कि फास्टिंग के पीछे की साइंस और रिसर्च अभी बहुत ही प्रारंभिक स्टेज में है। इसलिए, इसे अपने आहार और लाइफस्टाइल के हिसाब से करना और अपने डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। उपवास के पीछे विज्ञान को समझने के लिए, ये भी जाना बहुत जरूरी है कि उपवास के अलग अलग प्रकार है जैसे कि वैकल्पिक दिन का उपवास, सीमित समय का उपवास और लंबा उपवास।

Alternate day fasting में एक दिन फास्टिंग और एक दिन नॉर्मल डाइट का सेवन होता है, time-restricted fasting में कुछ घंटे तक आहार खाने के लिए छोड़ता है और long फास्टिंग में कई दिनों तक खाना और पीना बंद किया जाता है। हर प्रकार के उपवास के लिए सही तारीख से तैयार होना और अपने आहार और जीवनशैली पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

सभी तारिको में, समय-प्रतिबंधित उपवास बहुत ही लोकप्रिय तारिका है। इसमें, दिन के कुछ घंटे तक आहार खाना छोड़ देता है, जिससे शरीर “उपवास” मोड में आ जाता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी भी बेहतर हो जाती है। इसमें, एक common approach है कि 16 घंटे तक खाना और पीना बंद रखा जाए और फिर खाना शुरू किया जाए। इसका मतलब है कि अगर शाम के 7 बजे खाना शुरू किया जाए, तो सुबह के 11 बजे तक खाना और पीना बंद रखा जाए।

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फास्टिंग एक बहुत ही पावरफुल टूल है अपनी सेहत और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए, लेकिन इसे सुरक्षित तरीके से करना बहुत जरूरी है। साथ ही सही आहार और व्यायाम का सेवन करना भी बहुत जरूरी है। उपवास के दौरन पानी और पोषक तत्व का सेवन करना, छोटे छोटे व्रत से शुरू करना और healthcare प्रोफेशनल से सलाह लेना बहुत जरूरी है। उपवास के पीछे की साइंस और रिसर्च अभी बहुत ही प्रारंभिक स्टेज में है, इसे इसे अपने आहार और लाइफस्टाइल के हिसाब से करना बहुत जरूरी है।

संभावना आत्मक खतरे और विचार(considerations)

संभवातमक खतरे और विचार का मतलब होता है “संभावित जोखिम और विचार”। ये बहुत जरूरी है हर काम करने से पहले, जैसे की मेडिकल कंडीशन या फिर उपवास के बारे में। इस लेख में, हम उपवास और संभावना आत्मक खतरों को विचार करने और डॉक्टर से परामर्श लेने के महत्त्व के बारे में बात करेंगे।

सबसे पहले, हम उपवास से पहले से मौजूद चिकित्सीय स्थितियों पर विचार करने का महत्त्व समझेंगे। उपवास एक धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथा है जिसमें कुछ समय तक खाना और पानी से परहेज़ किया जाता है। लेकिन ये जरूरी नहीं कि हर कोई फास्ट कर सकता है, खास अगर उसके पास पहले से मौजूद मेडिकल कंडीशन है। जैसे की डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी के मरीजों को फास्टिंग से जुड़े खतरों से बचना बहुत जरूरी है।

इस्लीये, उपवास से पहले संभवातमक खतरों को मानना बहुत जरूरी है। इसके लिए, आपको डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रोफेशनल से मिलना चाहिए और उनसे अपने लिए फास्टिंग सेफ है या नहीं, इसका परामर्श लेना चाहिए। उनकी मदद से आप खतरों को पहचान सकते हैं और सही रास्ते से फास्ट करने के उपाय भी जान सकते हैं।

ये भी ध्यान में रखना जरूरी है कि उपवास सभी के लिए जरूरी नहीं है, और धार्मिक या सांस्कृतिक कारण के लिए भी जरूरी नहीं है। इस्लीये, उपवास के उद्देश्य को और जरूरी होने पर ही उपवास करना चाहिए।

इसके अलावा, उपवास से जुड़े खतरों को मानना बहुत जरूरी है, चाहे आपके पास पहले से मौजूद मेडिकल कंडीशन हो या ना हो। जैसे की लंबा टाइम तक फास्टिंग से dehydration , कमजोरी और थकन जैसे खतरे भी होते हैं, जो आपके स्वास्थ्य और सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। इस्लीये, फास्टिंग से पहले प्रॉपर तैयारी करना बहुत जरूरी है, जिस्मे बॉडी को अच्छे से हाइड्रेटेड और अच्छी तरह से पोषित रखना बहुत जरूरी है।

अब हम डॉक्टर से परामर्श लेना के महत्व के बारे में बात करेंगे। हर काम करने से पहले, संभवातमक खतरों को विचार करना बहुत जरूरी है, खासकर अगर आपके पास पहले से मौजूद मेडिकल कंडीशन है। कुछ एक्टिविटीज, जैसे कि रनिंग या weightlifting, जिस्मे फिजिकल एक्टिविटी include होती है, ऐसी एक्टिविटीज के लिए भी डॉक्टर से परामर्श लेना बहुत जरूरी है। आपका डॉक्टर आपको ये बताएंगे कि आपके लिए ये एक्टिविटी सेफ है या नहीं।

इसी तरह, आपको डॉक्टर से परामर्श लेना बहुत जरूरी है, अगर आप एडवेंचरस एक्टिविटी जैसे की rock climbing, skydiving या बंजी जंपिंग के बारे में सोच रहे हैं।

Fasting के दौरन कितना वजन घटाना संभव है? 

उपवास एक तारिका है वजन कम करने का, लेकिन ये वजन घटाने का राशि [मात्रा] व्यक्ति के शरीर की रचना, चयापचय और उपवास का समय पर निर्भर करता है। उपवास के दौरान शरीर अपने स्टोर फैट को एनर्जी के लिए बर्न करता है, जिसका वजन कम होता है। लेकिन वजन कम होने का राशि व्यक्ति के उम्र, लिंग, शुरुआत वजन और मेटाबॉलिज्म पर असर डालता है।

जिन लोगों का बीएमआई ज्यादा है और वजन अधिक है उन्हें उपवास के दौरन अधिक वजन कम हो सकता है। लेकिन याद रखें कि ज्यादा तेज से वजन घटाना आरोग्य [स्वास्थ्य] के लिए हानिकारक हो सकता है और ये मनस्पेशियो का क्षय या पोषण की कमी के कारण होता है।

कुछ फैक्टर होते हैं जो उपवास के दौरान वजन घटने पर असर डालते हैं, जैसे कि:

उपवास का समय: जितना लंबा उपवास, वजन घटाना उतना अधिक होता है। लेकिन लंबा उपाय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इस लिए उपवास को हेल्थकेयर प्रोफेशनल की देख रेखा के साथ करना जरूरी है।

शुरति वजन: वजन ज्यादा वाले लोग उपवास के दौरन वजन कम करने के लिए ज्यादा प्रभावित होते हैं।

मेटाबॉलिज्म: मेटाबॉलिज्म जल्दी होने पर उपवास के दौरान ज्यादा कैलोरी बर्न होते हैं और वजन जल्दी कम होता है।

लिंग: पुरुष महिलाओं के तुला में उपवास के दौरन अधिक वजन कम कर सकते हैं, शरीर की रचना और मेटाबॉलिज्म के अंतर से।

उमर: बूढ़ापे में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, इस लिए उपवास के दौरन युवा लोगों के साथ वजन कम होने में ज्यादा समय लग सकता है।

पोषण की स्थिति: कुछ पोषक तत्वों की कमी होने पर वजन कम करने में धीरज रखना पड़ता है, क्योंकी शरीर पोषण की कामी को पूरा करने के लिए स्टोर फैट को होल्ड करता है।

शारीरिक गतिविधि: व्यायाम और शारीरिक गतिविधि वजन कम करने के लिए उपवास के दौरन अधिक कैलोरी बर्न करने और स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करते हैं।

एक 7 दिन का उपाय करना वजन कम करने में सक्षम है, लेकिन इससे पहले एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल की देख रेखा में उपवास करना चाहिए और किसी भी तरह की हानिकारक प्रतिक्रिया के लिए मॉनिटर करना चाहिए। कुछ उधार दिए गए हैं:

प्रारंभि वजन: एक आदमी जिसका वजन 200 पाउंड है, वो 7-दिन के उपवास के दौरन लगभग 10-20 पाउंड वजन कम कर सकता है।

Metabolism : जिस व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म जल्दी है, वो ज्यादा वजन कम कर सकता है। एक अध्ययन के अनुसर, जिस्मे 249 व्यक्तियों का हिस्सा लिया गया था, उनके से जिनके मेटाबॉलिज्म फास्ट था, अनहोने ज्यादा वजन कम किया था उपवास के दौरन।

शारीरिक गतिविधि: अगर उपवास के दौरन व्यायाम किया जाए तो वजन कम करने का प्रभाव ज्यादा होता है। एक अध्ययन में पता चला था कि व्यायाम के साथ उपवास करने से वजन कम करने का प्रभाव ज्यादा होता है।

पोषण की स्थिति: अगर किसी व्यक्ति की पोषण की स्थिति ठीक नहीं है, तो वजन कम करने का प्रभाव कम होता है। अगर किसी व्यक्ति को पोषण की कमी है, तो वो उपवास के दौरान कैलोरी को सीमित करने के लिए एक अच्छी पोषण वाली डाइट लेनी चाहिए।

उपवास के दौरान वजन कम करने के अलावा, उपवास और भी कोई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है, जैसे कि इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने से डायबिटीज कंट्रोल में मदद मिलती है, कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने से दिल के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है, और कॉग्निटिव फंक्शन को भी सुधरने में मदद मिलती है।

अंत में, उपवास वजन कम करने का एक असरदार तारिका है, लेकिन ये एक हेल्दी डाइट और व्यायाम की जरूरत को पूरा करने के बजाए एक स्टैंड-अलोन तारिका नहीं है। उपवास को शुरू करने से पहले, एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल की सलाह जरूर लेनी चाहिए और उपवास का सही समय और प्रकार तय करना चाहिए।

Fasting के बाद वजन को मेंटेन कैसे करें?

उपवास के बाद वजन को बनाए रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए कुछ टिप्स है जो आपको मदद करेंगे:

धीरे-धीरे खाना शुरू करें : ज्यादा भोजन करने से बचें। शुरू में हल्का भोजन करें जैसे फल, सूप या सलाद। खाने को धीरे-धीरे चबा के खाए और खाने का समय लें।

सतत जीवन शैली में बदलाव (सांभविक जीवन शैली में बदलाव): वजन को बनाए रखने के लिए सांभाविक जीवन शैली के बदलाव करने की जरूरत है। ये बदलाव होते हैं:

क) संतुलित आहार : सभी पोषक तत्वों की मात्रा को ध्यान में रखें। फल, सब्जी, पूरे अनाज, ताजी दाल, चिकनई कम खायें।

ख) भाग नियंत्रण (भोजन की मात्रा को नियंत्रित करें): कम बरतन इस्तेमाल करे। सब्जी का आधा, प्रोटीन का एक हिस्सा और पूरा अनाज का एक हिस्सा।

ग) नियमित व्यायाम : काम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। walk, जॉगिंग, cycling या स्विमिंग में से कुछ भी करें।

डी) Hydrated रहें (पानी पीएं): पानी पीने से पेट भरा लगता है और ज्यादा खाना खाने से बचाते हैं। पानी पेट साफ करने में मदद करता है।

ङ) पर्याप्त नींद लें (अच्छी नींद लें): अच्छी नींद लेने से हार्मोन सही तारिके से काम करते हैं और ज्यादा खाने से बच्चा जा सकता है।

इन सब टिप्स का इस्तमाल करके वजन को मेंटेन करना संभव है और इससे आप अपनी सेहत भी सुधार सकते हैं। फास्टिंग के बाद वजन को मेंटेन करना आसान नहीं है, लेकिन संभव है। इसके लिए आपको खाना, व्यायाम और नींद को नियंत्रित रखना होगा। फास्टिंग का इस्तमाल एक शॉर्ट-टर्म वेट लॉस के लिए किया जा सकता है, लेकिन सस्टेनेबल लाइफस्टाइल चेंज करने से आपको लॉन्ग-टर्म वेट मैनेजमेंट हासिल हो सकता है।

वजन को बनाए रखने के लिए आपको संतुलित आहार, भाग नियंत्रण, नियमित व्यायाम, हाइड्रेटेड रहना और पर्याप्त नींद की जरूरत है। ये सभी फैक्टर्स सही तरीके से काम करते हैं और आपको एक हेल्दी लाइफस्टाइल प्रोवाइड करते हैं।

यह टिप्स इस्तेमल करके आप अपने वजन को मेंटेन कर सकते हैं और साथ ही अपनी सेहत भी सुधार सकते हैं। ध्यान रखने की sustainable lifestyle changes के बिना कोई भी weight loss solution लॉन्ग टर्म नहीं है।

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