मशहूर उर्दू शायर मुनव्वर राणा का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर

मशहूर उर्दू शायर मुनव्वर राणा का 71 वर्ष की आयु में लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट से 14 जनवरी, 2024 को निधन हो गया। वह कई महीनों से लंबी बीमारी से जूझ रहे थे। राणा अपनी मुशायिरों (काव्य गोष्ठियों) में उल्लेखनीय उपस्थिति के लिए जाने जाते थे और उन्हें अपने काम के लिए कई पुरस्कार मिले थे, जिनमें 2014 में उनकी कविता पुस्तक ‘शहदबा’ के लिए प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार भी शामिल था। हालांकि, देश में बढ़ती असहिष्णुता के कारण उन्होंने लगभग एक साल बाद यह पुरस्कार वापस कर दिया था।

उन्हें मिले अन्य पुरस्कारों में अमीर खुसरो पुरस्कार, मीर तकी मीर पुरस्कार, ग़ालिब पुरस्कार, डॉ. ज़ाकिर हुसैन पुरस्कार और सरस्वती समाज पुरस्कार शामिल हैं। उनके कार्यों का कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है और उन्होंने अपना अधिकांश जीवन कोलकाता में बिताया। राणा उत्तर प्रदेश के राजनीतिक विकास में भी सक्रिय थे और उनकी बेटी सुमैया समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्य हैं जिसका नेतृत्व अखिलेश यादव करते हैं। भारतीय साहित्य जगत में उनका एक विशाल प्रशंसक समूह था और उन्हें अपनी कविता में हिंदी और अवधी शब्दों का खूबसूरती से प्रयोग करने, फारसी और अरबी से परहेज करने के लिए जाना जाता था।

मुनव्वर राना की मौत का कारण क्या था?

मुन्नवर राणा का निधन हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) के कारण हुआ। 71 वर्ष की आयु में वह लंबी बीमारी से जूझने के बाद चल बसे। कई महीनों से वे किडनी और हृदय संबंधी समस्याओं का इलाज करा रहे थे।

मुनव्वर राना की लंबी बीमारी की वजह क्या थी?

मुन्नवर राणा अपने निधन से पहले कई महीनों से एक लंबी बीमारी से जूझ रहे थे। उनका गुर्दे और हृदय से संबंधित समस्याओं का इलाज चल रहा था। उनकी बेटी सुमैया राणा ने पहले बताया था कि डायलिसिस के दौरान उन्हें पेट में तेज दर्द हुआ था, और सीटी स्कैन के बाद डॉक्टरों ने उनके लिवर में समस्या पाया। उनका एक ऑपरेशन हुआ, जिसके बाद उनकी हालत में सुधार हुआ था और वह खाना भी पी रहे थे। हालांकि, शनिवार को उन्हें तीन बार दिल का दौरा पड़ा। दुर्भाग्य से, उनके स्वास्थ्य में और गिरावट के बाद, 14 जनवरी, 2024 को हृदय गति रुकने के कारण उनका निधन हो गया।

मुनव्वर राणा की कुछ सबसे प्रसिद्ध कविताएँ क्या थीं?

मुनव्वर राणा की कुछ सबसे प्रसिद्ध कविताएँ निम्नलिखित हैं:

  • माँ – यह कविता एक माँ के प्रेम और त्याग की प्रशंसा करती है। यह एक ग़ज़ल है, और इसमें हिंदी और अवधी शब्दों का खूबसूरती से प्रयोग किया गया है।
  • परिंदों के लिए शहरों में पानी कौन रखता है – यह कविता आधुनिक शहरी जीवन की व्यस्तता और उदासी को दर्शाती है। यह एक मुक्त छंद है, और इसमें राणा की सामाजिक चेतना की झलक मिलती है।
  • मैं चाहता हूँ कि तुझ पर किसी का हक न रहे – यह कविता प्रेम के एकाकीपन और विरह की भावना को व्यक्त करती है। यह एक ग़ज़ल है, और इसमें राणा की प्रेम-कविता की बारीकियों का अनुभव किया जा सकता है।
  • हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं – यह कविता प्रेम के आवेग और उत्साह को दर्शाती है। यह एक ग़ज़ल है, और इसमें राणा की भावनाओं की अभिव्यक्ति की ताकत का अनुभव किया जा सकता है।
  • ये सर-बुलंद होते ही शाने से कट गया – यह कविता एक व्यक्ति की उन्नति और सफलता के बाद आई निराशा और उदासी को दर्शाती है। यह एक मुक्त छंद है, और इसमें राणा की जीवन-दृष्टि की गहराई का अनुभव किया जा सकता है।

इनके अलावा, मुनव्वर राणा की अन्य प्रसिद्ध कविताएँ में शामिल हैं:

  • अँधेरे और उजाले की कहानी सिर्फ़ इतनी है
  • वो बिछड़ कर भी कहाँ मुझ से जुदा होता है
  • तेरे एहसास की ईंटें लगी हैं इस इमारत में
  • तुमसे बिछड़ा तो पसंद आ गयी बे-तरतीबी
  • फ़रिश्ते आके उनके जिस्म पर ख़ुश्बू लगाते हैं

मुनव्वर राणा की कविता उनकी गहरी भावनाओं, सामाजिक चेतना और भाषा के प्रति प्रेम के लिए जानी जाती है। उनकी कविताएँ आज भी भारतीय साहित्य में लोकप्रिय हैं।

मुनव्वर राना की शायरी का उर्दू साहित्य पर क्या प्रभाव पड़ा?

मुनव्वर राना की शायरी का उर्दू साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने उर्दू ग़ज़ल को एक नए आयाम दिया, और उन्होंने अपनी कविता में हिंदी और अवधी शब्दों का प्रयोग करके उर्दू भाषा को अधिक लोकप्रिय बनाया।

मुनव्वर राना की शायरी की कुछ विशेषताएँ हैं जो उन्हें उर्दू साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान देती हैं। ये विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • गहरी भावनाएँ: मुनव्वर राना की शायरी में गहरी भावनाएँ हैं। वह प्रेम, विरह, उदासी, खुशी, और सामाजिक चेतना जैसे विभिन्न विषयों पर कविताएँ लिखते हैं। उनकी कविताएँ पाठकों के दिलों को छू जाती हैं।
  • सामाजिक चेतना: मुनव्वर राना एक जागरूक कवि थे। उनकी कविताओं में सामाजिक चेतना की झलक मिलती है। वह समाज में व्याप्त अन्याय, भेदभाव, और असमानता के खिलाफ आवाज उठाते हैं।
  • भाषा का प्रयोग: मुनव्वर राना एक कुशल भाषाविद् थे। उन्होंने अपनी कविता में हिंदी और अवधी शब्दों का प्रयोग करके उर्दू भाषा को अधिक लोकप्रिय बनाया। उनकी कविता में भाषा का प्रयोग सरल और सुबोध है, लेकिन इसका प्रभाव गहरा है।

मुनव्वर राना की शायरी ने उर्दू साहित्य के कई युवा कवियों को प्रभावित किया है। उनके बाद के कई कवियों ने उनकी शैली और विषयों को अपनाया है। मुनव्वर राना को उर्दू साहित्य के एक प्रमुख हस्ताक्षर के रूप में जाना जाता है, और उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

मुनव्वर राना की शायरी के उर्दू साहित्य पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े हैं:

  • उर्दू ग़ज़ल को एक नए आयाम दिया: मुनव्वर राना ने उर्दू ग़ज़ल को एक नए आयाम दिया। उन्होंने ग़ज़ल में सामाजिक चेतना और आधुनिक विषयों को शामिल किया। उनकी ग़ज़लें पाठकों के दिलों को छू जाती हैं, और वे आज भी उतनी ही लोकप्रिय हैं जितनी कि उनके लेखन के समय थीं।
  • उर्दू भाषा को अधिक लोकप्रिय बनाया: मुनव्वर राना ने अपनी कविता में हिंदी और अवधी शब्दों का प्रयोग करके उर्दू भाषा को अधिक लोकप्रिय बनाया। उन्होंने उर्दू भाषा को अधिक सरल और सुबोध बनाने का प्रयास किया। उनकी कविता में भाषा का प्रयोग सरल और सुबोध है, लेकिन इसका प्रभाव गहरा है।
  • युवा कवियों को प्रेरित किया: मुनव्वर राना की शायरी ने उर्दू साहित्य के कई युवा कवियों को प्रभावित किया है। उनके बाद के कई कवियों ने उनकी शैली और विषयों को अपनाया है। मुनव्वर राना को उर्दू साहित्य के एक प्रमुख हस्ताक्षर के रूप में जाना जाता है, और उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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