Large cap funds में invest करना कितना safe माना जाता है? इनमें risk level कितना होता है?

large cap funds

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सबसे common सवाल यही होता है — क्या लार्ज कैप फंड में निवेश safe bet माना जा सकता है? FD में पैसा डालने से मन को शांति मिलती है, लेकिन रिटर्न देखकर लगता है — “इतने साल में इतना ही?” दूसरी तरफ stock market और mutual funds हैं — … Read more

लार्ज कैप फंड क्या होते हैं, और ये बाकी फंड्स से कैसे अलग हैं?

लार्ज कैप फंड क्या होते हैं और ये बाकी म्यूचुअल फंड्स से कैसे अलग हैं

“म्यूचुअल फंड में निवेश करना है… लेकिन Large Cap, Mid Cap, Small Cap — समझ ही नहीं आ रहा कि कौन-सा सही है?” अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में ज़्यादातर नए निवेशक यहीं अटक जाते हैं। कोई दोस्त कहता है “Large cap safe होता है”, कोई … Read more

लार्ज कैप फंड में पैसा डूब सकता है? 90% Investors ये सच नहीं जानते

लार्ज कैप फंड में जोखिम कितना है – भारतीय निवेशक के साथ large cap mutual fund risk को समझाता हुआ illustration

जब भी कोई नया investor म्यूचुअल फंड में कदम रखने की सोचता है, सबसे पहले यही सुनने को मिलता है — “लार्ज कैप फंड में डालो, ये safe होते हैं।” FD से कम return मिल रहा हो, शेयर बाजार से डर लगता हो, और social media पर हर दूसरे दिन market crash की खबरें आ … Read more

सिर्फ 500 या 1000 रुपये महीने से फाइनेंशियल फ्रीडम की शुरुआत – क्या सच में हो सकती है?

फाइनेंशियल फ्रीडम की शुरुआत

सीधा जवाब: हाँ – फाइनेंशियल फ्रीडम की शुरुआत सिर्फ ₹500 या ₹1000 महीने से की जा सकती है। इससे शुरुआत छोटी होगी, लेकिन समय, अनुशासन, सही निवेश और Step-Up strategy के साथ आगे चलकर यही अमाउंट आपके financial freedom की strong foundation बन सकता है। 👉 छोटी शुरुआत = सोच बढ़ाने की शुरुआत👉 धीरे-धीरे SIP … Read more

महीने के 30,000–40,000 की सैलरी में स्मार्ट तरीके से बजट कैसे बनाया जाए? (Ultimate Budgeting Guide 2026)

महीने के 30,000–40,000 की सैलरी में स्मार्ट तरीके से बजट कैसे बनाया जाए?

अगर आपकी महीने की सैलरी ₹30,000–₹40,000 के बीच है और हर महीने ये महसूस होता है कि “Salary आई और गई… बचा कुछ नहीं” — तो आप अकेले नहीं हैं। सच्चाई ये है: भारत में लगभग 67% salaried लोग monthly savings नहीं कर पाते.👉 इसका कारण कम सैलरी नहीं, बल्कि सही बजटिंग की कमी है। … Read more